भारतजेन और अमृता संस्थानों के बीच समझौता, स्वदेशी मेडिकल फाउंडेशन मॉडल पर फोकस
नई दिल्ली: स्वास्थ्य तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए BharatGen Technology Foundation और Amrita Vishwa Vidyapeetham ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य भारत की विविध चिकित्सा जरूरतों के अनुरूप संप्रभु (Sovereign), बहुभाषी AI समाधान विकसित करना है।
इस सहयोग के तहत भारत-केंद्रित मेडिकल फाउंडेशन मॉडल, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (EMR) के लिए डोमेन-विशिष्ट AI फ्रेमवर्क और स्पीच-फर्स्ट मल्टीमॉडल सिस्टम विकसित किए जाएंगे। इन सभी प्रणालियों में जिम्मेदार AI (Responsible AI) को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि क्लीनिकल और सामुदायिक उपयोग में सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।
BharatGen Technology Foundation, जो Indian Institute of Technology Bombay (IIT बॉम्बे) में आधारित एक सेक्शन-8 गैर-लाभकारी संस्था है, देश में आधारभूत AI अनुसंधान और संप्रभु मॉडल विकास का नेतृत्व कर रही है।
भारतजेन के CEO श्री हृषिकेश मोहन बाल ने कहा कि भारत की AI संप्रभुता केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत दृष्टि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह साझेदारी स्वास्थ्य क्षेत्र में उस दृष्टि को संस्थागत रूप देती है, जहां दांव बहुत ऊंचे हैं।
दूसरी ओर, अमृता टेक्नोलॉजीज EMR सिस्टम और हेल्थकेयर डेटा इंजीनियरिंग में गहरी विशेषज्ञता लेकर आई है। Amrita Hospitals इस परियोजना के क्लीनिकल सत्यापन और वास्तविक उपयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।
इस सहयोग की पहली बड़ी उपलब्धि ‘Med-Sum’ को बड़े स्तर पर लागू करना है। यह एक AI आधारित मेडिकल समरी सिस्टम है, जिसे अमृता स्कूल ऑफ AI (दिल्ली NCR, फरीदाबाद कैंपस) ने विकसित किया है और जिसे भारतजेन के संप्रभु स्पीच एवं AI मॉडल से संचालित किया जा रहा है।
Med-Sum के जरिए रियल-टाइम वॉइस-टू-टेक्स्ट क्लिनिकल ट्रांसक्रिप्शन, स्वचालित क्लिनिकल सारांश और कई भारतीय भाषाओं में मरीज-हितैषी व्याख्या संभव हो पाती है। फरीदाबाद और कोच्चि स्थित अमृता अस्पतालों में कठोर क्लिनिकल परीक्षण के बाद यह प्लेटफॉर्म सैकड़ों डॉक्टरों और मरीजों द्वारा उपयोग में लाया जा रहा है।
इस तकनीक का लाइव प्रदर्शन 16 से 20 फरवरी 2026 तक Bharat Mandapam में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भारतजेन पवेलियन (हॉल 1, स्टॉल 1.17) पर किया जा रहा है। यह पहल भारत में समावेशी और तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
